Sunday, December 10, 2006

ले चलो ना

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो....

गई बार जब तुम गये थे…
आवारा चँदा आँगन में आकर...
खिड़की से मुझको ठेंगा दिखाकर…
पूरी रात उसने परेशान किया था...
.......................................
जाने से पहले कहना तुम उसको
नहीं आना घर पर
जब हूँ मैं अकेले…..

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो.....

निगोड़ी वो नींद
जिसको तुमने कहा था
रहे साथ मेरे
.......नहीं आई थी वो
इन्तजार करती रही
.....................................
जाने से पहले
उँगली से अपने….
पलकों में मेरे…
उसे बिठा कर तुम जाना

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो....

जाड़े की सर्दी बढ़ने लगी है…
कंबल भी धोभी लेकर गया है…
अपने सीने की गर्मी
आलिंगन में भर कर
जाने से पहले
मुझे देते जाना…

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो....

मुर्गा गया है चूजों से मिलने
सुबह काम पर भी जल्दी है जाना
सपनों में आना करीबन सवेरे
चाय की गर्मी तो कैसे तुम दोगे??
नर्मी से मुझको छू के तुम जाना

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो.....

बुलाना मुझे
जब चलने लगोगे..
फिर रास्ते में…..
जब पहुँचो वहाँ पर
सोने से पहले…….
जगने के बाद…
आने से पहले…
जाने के बाद…

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो.....

अरे टाईम हो गया है
क्या क्या करोगे….
चंदा को डाँट, नींद को फटकार
छूना .....फिर बाहों में लेना...
…………………….
सामान मेरा बँधा ही पड़ा है...
चलूँ क्या??

जाना है तुमको तो जाओ
पर सुनो....
.................
मुझे ले चलो ना....

Tuesday, December 05, 2006

निद्राभाव

क्या तुमने आवाज़ दी थी ....??

ना जाने क्या सुना उठ गई.....
कहीं कोई ध्वनी की तरंग नहीं...
सन्नाटा रात की गोद में एकदम छुप...
फिर यह दस्तक मेरी रूह पर...
क्या तुमने दी थी...??


खिड़की से झाँका
साये एक दूसरे के आसपास सुस्ता रहे थे
कुछ गहरे..कुछ हल्के ...
....करवट बदल रहे थे
अँधेरे के चश्मे से...
मन का ग्रहण साफ नज़र आ रहा था

मुड़ी थी...
लगा पास ही कुछ सिसक रहा हो
.....................................
कुछ भी नहीं था…
फिर किसका हाथ लगा था...
कुछ चींटे उड़े थे..
और आँख गीली हुई...

महसूस कर सकती थी
हवा में कोई खुशबू…
कोई पैगाम मेरे नाम…
शायद खिड़की से बाहर...

बाहर समय की बारिश हो रही थी
अब दिखा हवा में उड़ता हुआ…
भीगा धुँधला कोई संदेश…
किनारों से फटा ...सायों के पास

बारिश तेज़ थी
कहीं बिजली भी गिरी
…………………..
जब थमी...
सुबह हो चुकी थी...

मुर्गे की बाँग की आवाज़ कहीं दूर से आ रही थी..