एक शंख …
लहरों की आवाज़…
थोड़ा नमक….
थोड़ा पानी…..
यूँ ही इतरा रही…
यह सोच…
अंजली में समन्दर है….!
दिवानी !!
लहरों की आवाज़…
थोड़ा नमक….
थोड़ा पानी…..
यूँ ही इतरा रही…
यह सोच…
अंजली में समन्दर है….!
दिवानी !!
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
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5 comments:
अंजली में भी थोड़ा नमक थोड़ा पानी और समुद्र का अहसास !
हाँ अगत्स्य हम
भरा आँजुरि
एक समन्दर
कितना गहरा
फिर भी उथला !!!!!
शुभकामनायें
बहुत सुन्दर। बधाई स्वीकारें।
राकेशजी आपकी टिप्पणी पसंद आई । Dr.Bhawna जी आपको अपने ब्लाग पर पहली बार देखा । बहुत अच्छा लगा ।
Aflatoon जी आपकी टिप्पणी पढ़कर लगा कह रहे हों....ऐसा भी भ्रम हो सकता है...क्या बतायें ऐसे भ्रमों के सहारे ही इतनी जिन्दगी तय की है ।
अच्छा खयाल है ।
कुछ दिन पहले एक गज़ल (के समान) लिखनें की कोशिश की थी )
ख्वाबों को ऐसे सजाया है मैनें
हथेली पे सूरज उगाया है मैनें ।
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