Wednesday, February 07, 2007

भ्रम

एक शंख …
लहरों की आवाज़…
थोड़ा नमक….
थोड़ा पानी…..

यूँ ही इतरा रही…
यह सोच…
अंजली में समन्दर है….!
दिवानी !!

5 comments:

Aflatoon said...

अंजली में भी थोड़ा नमक थोड़ा पानी और समुद्र का अहसास !

राकेश खंडेलवाल said...

हाँ अगत्स्य हम
भरा आँजुरि
एक समन्दर
कितना गहरा
फिर भी उथला !!!!!

शुभकामनायें

Dr.Bhawna said...

बहुत सुन्दर। बधाई स्वीकारें।

Beji said...

राकेशजी आपकी टिप्पणी पसंद आई । Dr.Bhawna जी आपको अपने ब्लाग पर पहली बार देखा । बहुत अच्छा लगा ।
Aflatoon जी आपकी टिप्पणी पढ़कर लगा कह रहे हों....ऐसा भी भ्रम हो सकता है...क्या बतायें ऐसे भ्रमों के सहारे ही इतनी जिन्दगी तय की है ।

अनूप भार्गव said...

अच्छा खयाल है ।
कुछ दिन पहले एक गज़ल (के समान) लिखनें की कोशिश की थी )

ख्वाबों को ऐसे सजाया है मैनें
हथेली पे सूरज उगाया है मैनें ।