कुछ नये सपने अपने मुट्ठी में कर
मेरी पलकों में फिर उनको तू भर
पुराने सपनों में उठी रूईयॉ
हकीकत से इनकी बडी दूरियाँ
कोई ख्याल ख्वाब सा लाकर दे
बँद तहखाने से कोई याद हाथों में ले
मासूमियत पर पडी हैं झुर्रियॉ
लेकर आ पुरानी कोई लोरियॉ
दीवारों पर कहानी मिटने लगी है
नये रंग से रंगने को तैयार खडी है
आज फिर इनके बीच आ बसायें आशियॉ
उँगली से पकड़ कर लाये रश्मियॉ
घुटने से उठे अरसा हो गया
पैरों पर खडे अब थकने लगे हैं
अपने सहारों की दे दे बैसाखियॉ
अब लडखडाने से डर लगता साथियॉ
अधूरा था तू…अधूरी थी मैं
साथ होकर भी कभी अधूरे लगते हैं हम
आजा… आज भुला दे खामियॉ
मैं जैसी भी हूँ …हूँ तेरी साथियॉ
आज तारीक़ क्या है…पता ही नहीं
वार का भी ध्यान मुझको नही
तू साथ हो …हँसे पगडण्डियाँ …
खिले कलियॉ …अपनी लगे गलियॉ
…………………………………
मिलन की बजे शहनाईयॉ
मेरी पलकों में फिर उनको तू भर
पुराने सपनों में उठी रूईयॉ
हकीकत से इनकी बडी दूरियाँ
कोई ख्याल ख्वाब सा लाकर दे
बँद तहखाने से कोई याद हाथों में ले
मासूमियत पर पडी हैं झुर्रियॉ
लेकर आ पुरानी कोई लोरियॉ
दीवारों पर कहानी मिटने लगी है
नये रंग से रंगने को तैयार खडी है
आज फिर इनके बीच आ बसायें आशियॉ
उँगली से पकड़ कर लाये रश्मियॉ
घुटने से उठे अरसा हो गया
पैरों पर खडे अब थकने लगे हैं
अपने सहारों की दे दे बैसाखियॉ
अब लडखडाने से डर लगता साथियॉ
अधूरा था तू…अधूरी थी मैं
साथ होकर भी कभी अधूरे लगते हैं हम
आजा… आज भुला दे खामियॉ
मैं जैसी भी हूँ …हूँ तेरी साथियॉ
आज तारीक़ क्या है…पता ही नहीं
वार का भी ध्यान मुझको नही
तू साथ हो …हँसे पगडण्डियाँ …
खिले कलियॉ …अपनी लगे गलियॉ
…………………………………
मिलन की बजे शहनाईयॉ




10 comments:
बहुत खुबसूरत भाव हैं, बधाई:
आज तारीक़ क्या है…पता ही नहीं
वार का भी ध्यान मुझको नही
तू साथ हो …हँसे पगडण्डियाँ …
खिले कलियॉ …अपनी लगे गलियॉ
…………………………………
मिलन की बजे शहनाईयॉ
बज उठती है शहनाइयाँ जब अस्तित्व घुल-मिल जाता है…एकाकार और साक्षात्कार जब साक्षी से हो जाता है…>
अच्छी कविता सही समय में…बधाई!
सुंदर भाव लिये अच्छी कविता....बधाई
जो अधूरापन जुड़ा तो और दुगना हो गया
पास तुम आये, मेरा अस्तित्व तुम में खो गया.
याद जब बैसाखियां बन कर कभी आलंब हो
वो निमिष हर एक ढल कर स्वप्न मेरा हो गया
मेरी पसन्द:
अधूरा था तू…अधूरी थी मैं
साथ होकर भी कभी अधूरे लगते हैं हम
आजा… आज भुला दे खामियॉ
मैं जैसी भी हूँ …हूँ तेरी साथियॉ
बहुत सुंदर कविता है बधाई। प्रोफाईल मे आप दुबई और राजिस्तान मे एक साथ रहती हैं ;)
SHUAIBजी जानती हूँ दुबई में जिन्दगी की रफ्तार अधिक....और ट्रैफिक की कम है....फिर भी ठहर कर प्रोफाईल एक बार फिर पढ़ ले....वैसे दुबई में निवास होने पर भी अक्सर राजस्थान में ही रहती हूँ :))।
आप सबने सराहा....शुक्रिया...पर लगा भाव के साथ पूरा न्याय नहीं कर सकी।
राकेश जी आपकी पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी ।
कान खींचने का धन्यवाद Beji ;)
प्रोफाईल की समझ आगई
बेजी,
आपसे सहमत हूं. इस बार आप अपने भावों के साथ पूरा-पूरा न्याय नहीं कर पाईं . पूर्व में आपने इससे बहुत-बहुत अच्छा लिखा है . आशा है इसे अन्यथा नहीं लेंगी और आगे और भी अच्छा लिखेंगी .
are you from rajasthan? I am also =).....where in rajasthan are you from?
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