छोटी छोटी यादों को...
माला में पिरो दूँ मैं ...
मोती की तरह...
सीपी में छिपा दूँ मैं ...
फूलों की बहारो में ...
ओस सा सजा दूँ मैं ...
तेरे मेरे आँखो की...
चमक में बसा दूँ मैं ...
तू कहे तो…इन बूँदों को...
सागर से बढा दूँ मैं ...
सावन में बरसा दूँ ...
झरने में गिरा दूँ मैं ...
सरगम की रागों में ...
रंगों की महफ़िल में...
आँछल के तारों में ...
गोदी में छिपा दूँ मैं...
स्पर्श की नर्मी में ...
आलिंगन की गर्मी में...
तेरे स्वर में …मेरे शब्दों में ...
छोटी छोटी यादों को...
माला में पिरो दूँ मैं ...
माला में पिरो दूँ मैं ...
मोती की तरह...
सीपी में छिपा दूँ मैं ...
फूलों की बहारो में ...
ओस सा सजा दूँ मैं ...
तेरे मेरे आँखो की...
चमक में बसा दूँ मैं ...
तू कहे तो…इन बूँदों को...
सागर से बढा दूँ मैं ...
सावन में बरसा दूँ ...
झरने में गिरा दूँ मैं ...
सरगम की रागों में ...
रंगों की महफ़िल में...
आँछल के तारों में ...
गोदी में छिपा दूँ मैं...
स्पर्श की नर्मी में ...
आलिंगन की गर्मी में...
तेरे स्वर में …मेरे शब्दों में ...
छोटी छोटी यादों को...
माला में पिरो दूँ मैं ...




5 comments:
अच्छा लिखा!
सुन्दर अभिव्यक्ति...
याद रह जाती है और वक्त गुज़र जाता है
दर्द जो तूने दिया, इस दिल से भुलाया ना गया
बढ़िया है, अच्छा लगा पढ़कर.
स्पर्श की नर्मी में ...
आलिंगन की गर्मी में...
तेरे स्वर में …मेरे शब्दों में ...
छोटी छोटी यादों को...
माला में पिरो दूँ मैं ...
bahut sundar ehsaas hai jinko aapne is tarah lafzo ki mala mein peero diya hai ...
अहसासों की चांदनी में डूबता-उतराता छंद बनता दिख रहा है .
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