तेरे स्नेह के प्रकाश में
मैं अंकुरित हुई
एहसास के कोंपल खिले
मैं जीवित हुई
अनुराग में पली....
आस्था की कली
जडों को मज़बूत कर
मैं खड़ी हुई
तेरे सम्मुख
तुझे निहार कर
मैं बड़ी हुई
मैं अंकुरित हुई
एहसास के कोंपल खिले
मैं जीवित हुई
अनुराग में पली....
आस्था की कली
जडों को मज़बूत कर
मैं खड़ी हुई
तेरे सम्मुख
तुझे निहार कर
मैं बड़ी हुई



