सोती हुई साँसों को
आगोश मे बाँध कर
सुलगती हवा से फूँका
जगा दिया.....
जला दिया....
ठोस अस्तित्व
पिघल गया
सरल हुआ
तरल हुआ
मूक एहसास
बोलने लगे
शब्द के बिना
राज़ खोलने लगे
आग भी
साँस भी
आस भी
प्यास भी
साथ मिलते गये
प्यार बनते गये
आगोश मे बाँध कर
सुलगती हवा से फूँका
जगा दिया.....
जला दिया....
ठोस अस्तित्व
पिघल गया
सरल हुआ
तरल हुआ
मूक एहसास
बोलने लगे
शब्द के बिना
राज़ खोलने लगे
आग भी
साँस भी
आस भी
प्यास भी
साथ मिलते गये
प्यार बनते गये





