Wednesday, February 27, 2008

उसका जादू

जादू हाथ की सफाई
होती है.....
टोपी से तोता
मुट्ठी से रुमाल

वह कुछ अलग
किस्म का जादू जानती है...

कभी हँसा आती है...
रुला देती है.....
कभी पलकों के भीतर
सपने सुला आती है

कुछ अदा में यूँ इठलाती है
कि फूल खिल जाते हैं
बरसात की बूँदाबांदी
इंद्रधनुष
बन जाता है....
बादल
फूलों सा झर जाता है...

तभी तक
जब तक
वह सामने है
और सामने वाला
सम्मोहन में

......बाकी यह जादू भी
हाथ की सफाई है....

6 comments:

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

एक बात तो कहनी ही होगी बेजी के शब्दों का जादू सर चढ़के बोलता है... बेजी इज़ ग्रेट!

सुजाता said...

तभी तक
जब तक
वह सामने है
और सामने वाला
सम्मोहन में

......बाकी यह जादू भी
हाथ की सफाई है....

******
कितनी सच्ची बात कही ।
वैसे भी आजकल हम सब शॉर्ट मेमोरी वाले है :)जादू दर्द गम हादसा सब बदी जल्दी भूल जाती है दुनिया ।

Mired Mirage said...

बहुत सही कहा ।
घुघूती बासूती

ajay kumar jha said...

beji,
saadar abhivaadan. aapke jaado ne to bach ke jaado waalon kee yaad dilaa dee jinhein hum sadkon par badee shiddat se dekhaa karte the.

anuradha srivastav said...

वाह..........

जोशिम said...

मुग्धा - "बड़ी सयानी" कविता बेजी