कुछ मौन पल
कोरे कैनवास की तरह
थमा देते हो....
और मैं अपने शब्दों से
उनमें रंग भर देती हूँ.....
कभी कहते हो
मैने मन उतार दिया है....
तो कभी...
कि यही रंग
मन पर चढ़ा दे...
Tuesday, March 04, 2008
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POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
9 comments:
कहां से.. कहां से.. कहां से आखिर आती हैं इतनी कवितायें आपके पास? खिड़की के नीचे कोई कविता नदी बहती है? या घर किसी कविता नगर में है? एक फ्लैट मेरे लिए भी वहीं बुक क्यों नहीं करतीं?
हर बार की तरह - सुंदर....
सही कविताई बही.....
beji,
mujhe to lagta hai ki aap bahut hee kam shabdon mein bahut hee gahree aur bahut kuchh keh jaatee hain.
कभी कहते हो
मैने मन उतार दिया है....
तो कभी...
कि यही रंग
मन पर चढ़ा दे...bahut hi sundar bhavmein gehri baat,apki har kavita kisi nagine se kaam nahi.
beautiful poems....
बहुत बढ़िया - रंग बेहतर हैं केवल श्वेत श्याम से - यहाँ विराम क्यों? - rgds - manish
वाह ! बहुत सुन्दर ।
घुघूती बासूती
वाकई ....
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