बड़ी सी दुनिया के
छोटे से कोने में
धूल समेटती
रद्दी में पड़ी
एक पीले पुराने
पन्ने सी मिली....
खोये खजाने के
बक्से से गुम...
तहों में दबी...
कटे से किनारों में
खोई सी मिली....
मन के चित्र के
मानचित्र सी...
लक्ष्य की दिशा के
कम्पास सी
एक संदर्भ सी
संयोग सी मिली.....
..........................
ना जाने क्यों....
जब मिल गई
ऐसे लगा...
तलाश पूरी हुई......
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6 comments:
मन के चित्र के
मानचित्र सी...
लक्ष्य की दिशा के
कम्पास सी
एक संदर्भ सी
संयोग सी मिली.....
bahut gehre bhav sundar
nicely expressed
आप की काव्यरचना क्षमता से अब ईर्ष्या सी होने लगी है।
अजीब बात है न हरेक के पास होते है ऐसे संयोग......?
sundar... ati sundar...
बहुत अच्छे - पुरानी चिट्ठी ? कि पुरानी फोटो ? कि पुरानी मन की शान्ति - मनीष
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