Tuesday, March 11, 2008

आज भी

बड़े दिनों बाद
फिर एक पुराने ख्याल से
मुलाकात हो गई
लगाव से
बड़े चाव से
मैं देखती रही
उसे सोचती रही
नहीं
बदला नहीं था...
वैसा ही था
................
जाते जाते
आज भी
घाव कर के गया

9 comments:

मीत said...

Oh ! Class.

रश्मि said...

बहुत बढ़ि‍या। क्‍या अहसास है

Tarun said...

kya baat hai, jate jate ghav kar gaya

दिनेशराय द्विवेदी said...

बहुत गहरे जाती हैं आप की ये कविताएं।

mehek said...

bahut hi khub likha hai apne,wah.

Pratyaksha said...

ऐसे घाव करने वाले ख्याल
न आयें
सो ही अच्छा
और अगर
आ जायें
तो
जितनी जल्दी जायें
उतना अच्छा !

ajay kumar jha said...

beji,
aap sachmuch kaatil hain. katl kartee rahein, marne waalon kee line lagee hai.

कंचन सिंह चौहान said...

waaah

जोशिम said...

खूब - वैसे जैसा कुछ कुछ मैं प्रतिक्रिया कर पाता - प्रत्यक्षा जी ने उसकी अभिव्यक्ति का खेमा पहले ही छेंक दिया हिन्दी में और मीत ने अंगरेजी में - इसलिए डिट्टो [ :-)]