गरम बात को
सँभल कर
शब्दों में उतार आये......
थोड़ी पुड़िया में
बँधी समझ
उसमें
चला आये
देखा...
ठंडा पड़ने पर
आकार में
ढ़ल गया है.....
शब्द से
शब्द के
बीच के मौन में
सार मिल गया है
लगता है
जम गई....
आज
बात...बन गई...
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7 comments:
क्या रेसिपी है!
अच्छा !
lagta hai aaj baat ban gayi,bahut khub kaha hai.
क्या सधी हुई लय है !
har baar apko padh mein fresh ho jati hun...
really u write very well....
जीवन में अनेक बार घटे अनुभव को इस कविता में समेट दिया। बधाई।
बहुत बढ़िया "शब्द से / शब्द के / बीच के मौन में/ सार मिल गया है" - मनीष
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