
सूरज की एक किरण
लहर से उलझ गई
रंग में बिखर कर....
भीतर उतर गई...
मीन पर रजत सी
कंकड़ से सिमट गई.....
कभी बुलबुले सी
मोती सी पनप गई
बस जिसे...
छू गई...
रजत रंग संवर गई
लहर पर थिरक गई...
किरण सी चमक गई
प्रकाश सी ढ़ल गई
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
1 comments:
यह कविता किरण सी मन आँगन उतर गई ।
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