
आज रात
पिछवाड़े से
उस बदली तक,
एक पगडंडी
लेनी है...
कई दिन से
वो पगली
सूरज को
पकड़ कर बैठी है
....शायद...
अंतरंगता से
मेरे दामन में
वो रो ले.....
और सुबह
सूरज फिर
अलवण किरण की
रौशनी से खेले...
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
3 comments:
आप को बरसात भी चाहिए और सूरज भी। दोनों मिलेंगे।
अच्छा लिखती हैं आप। लिखते रहिए
badal aur suraj ko hi ek kar diya jaye to,bahut hi khubsurat baat kahi hai aapne.
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