Monday, March 24, 2008

स्वाद

एक चम्मच भर
थोड़ी शाम चखी
.....मीठी थी....
क्षितिज से उतरते उतरते
नमकीन हो गई....

2 comments:

अनूप शुक्ल said...

शाम नमकीन है! वाह!

Udan Tashtari said...

क्षितिज पर उतरने के पहले ही कटोरा भर खा लेना था...अच्छी कल्पनाशीलता. बढ़िया.