तुमने सोचा
दर्द छिपा कर रखोगे
मेरे सामने
मुस्कुराते रहोगे
मेरी चमक पर
आँच आये ना कोई
मुझे दूर ही
सँभाले रखोगे......
नहीं जानते क्या
इतना अभी भी....?!
मेरी चमक...
ओस सी ही नमी है....!
सीप सी ही है
हस्ती मेरी हमेशा...।
दर्द बाँटोगे ना तो...
कैसे मोती रचूँगी....?!
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7 comments:
क्या बात है..बहुत खूब..सचमुच 'मोती' हैं
बुझ गये हैं दीप वो ज्योति बनेंगे
दर्द के आंसू ही कल मोती बनेंगे
-- सुन्दर कविता के लिये बधाई ..
behad khoobsurat khayal aur adaaygee hai. jitni taarif kee jaaye kam hai.lekhnee yuun hee chaltee rahey , maa saraswati se yahee kaamna hai.
abhinandan...
- p k kush 'tanha'
http://pramodkumarkush.blogspot.com
बहुत सुन्दर ...
आँच से भी काँच में चमक आती है ,सुना है ।
"ADHBHUT"
वाह - सीप के मोती
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