Monday, March 31, 2008

फैन्टम शैडोज़


पूरी एक रात के अँधेरे को
काट काट कर
नाप के ...माप के....
साये बनाती रही.....
ताकि....
दिन के उजालों में....
यह साये पहना कर
मन में दुबके
ख्यालों को ...सवालों को....
आज़ाद कर दूँ.....

2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप का विचार प्रवाह अत्यन्त तीव्र है।

DR.ANURAG ARYA said...

खूबसूरत ....लिखते लिखते थक गया हूँ ....अब मेरी हाजिरी को ही मान लिजेयेगा की आपके कसीदे पढने आया हूँ