
पूरी एक रात के अँधेरे को
काट काट कर
नाप के ...माप के....
साये बनाती रही.....
ताकि....
दिन के उजालों में....
यह साये पहना कर
मन में दुबके
ख्यालों को ...सवालों को....
आज़ाद कर दूँ.....
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings

2 comments:
आप का विचार प्रवाह अत्यन्त तीव्र है।
खूबसूरत ....लिखते लिखते थक गया हूँ ....अब मेरी हाजिरी को ही मान लिजेयेगा की आपके कसीदे पढने आया हूँ
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