किसी वृत्त में
दो बिंदु की तरह मिले....
पास पास
मैं आगे थी...वो पीछे...
अजीब जिद थी
कि बीच का फासला
मैं तय करूँ...
...
और बस यूँ ही
फासले बढ़ गये
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12 comments:
aj bhi samaj ka sach yahi hai,bahut satik ta se likha hai,bahut badhai.
एक वृत्त पर आगे-पीछे कैसे तय होते होंगे ?
अफ़लातून जी,
अच्छा किया जो पूछा...गति की दिशा से....
bahut accha likha hai , dhaynabaad .
bahut badhiya likha hai aapne. dhanyabaad.
Deepak Kumar Bhanre
deep-007.blogspot.com
bahut sundar
वॄत मे मिले
दो बिंदुओ की तरह
ना वो पास ,
ना मै दूर
ना वो तेज चलने को राजी
ना मै धीरे
और बस यू ही
जिंदगी तमाम गुजर गई
तुम मिले, ऐसे मिले, मिल के फिर कभी न मिले
ज़िक्र होता है सुबह-शाम, यही क्या कम है ?
बहुत बढ़िया.
बहुत ही बहुत खूब डाक्साब - [p.s. शुक्र है मोबिअस स्ट्रिप पर नहीं रहे [:-) ]
अगर तुम्हारी ज़िद है
कि फ़ासला मै ही तय करूँ
तो वायदा करो
तुम मेरा इन्तज़ार करोगे ,
मैं ही कुछ तेज चल लेती हूँ
हम दोनों वृत्त में हैं ना
दूरी पहले तो बढेगी
फ़िर धीरे धीरे
मैं तुम में विलीन हो जाऊँगी ।
परिधि की अगली परिक्रमा
साथ करने का वायदा रहा ।
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