Thursday, April 03, 2008

हठ


देखा आसमाँ को...
यूँ लग रहा है मानो
सुस्ताये हाथों से
सफेदी में कूची डुबो कर
बादल को फैला दिया हो....
.....
माने नहीं तुम.....
खुदा को पूरी रात
दुआ माँग
उलझाये रखा!!

5 comments:

जोशिम said...

आमीन

Udan Tashtari said...

माने नहीं तुम.....
खुदा को पूरी रात
दुआ माँग
उलझाये रखा!!


--वाह!!

Pratyaksha said...

बच्चों सी ज़िद
पूरी भी हुई न
देखो
उग आया
माथे पर
सूरज !

अभिषेक ओझा said...

वाह !

अनूप भार्गव said...

बहुत अच्छी ...
बहुत ’गुलज़ारिश’ ....