Friday, April 04, 2008

रीफिल

मन की थाह
ढूँढ़ने ...
हर रोज़
शब्दाँजली में
भाव भर भर
निकाल आती हूँ....

....और फिर फिर
इसे भरा पाती हूँ....
...................
अगर कल
पकड़ नहीं आते तुम....
तो मुझे लगता
यह कोई जादू है....!!

4 comments:

जोशिम said...

अक्षयपात्र-? बना रहे - और ध्यान भी रहे अगली पोस्ट इस साल की पचासवीं [ :-)]

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप का मन इसी तरह रीफिल होता रहे, शब्दांजली हर बार कुछ न कुछ लेकर लौटे।

मीत said...

बहुत अच्छा लिखती हैं आप. या कहूँ, बहुत अच्छा सोचती हैं ........... कमाल है.
"....और फिर फिर
इसे भरा पाती हूँ...."
क्या बात है !

mehek said...

alag andaz ko bayan karti very beautiful one.