सोचती हूँ
किस तरह
नमी जो मिली
जड़ो से सोंक
अपनी धमनियों में
दौड़ा कर
लाल रंग बना....
फूल पर चड़ा दूँ....
हर रोज़ कहाँ
आँसू मिलते हैं.....!!
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POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
3 comments:
बहुत ही बढ़िया - क्या गुलाब क्या रजनीगंधा - [p.s. - (१) शायद धमनियों होना चाहिए दमनियों की जगह (२) शिराओं के नीले में भी गुन्जाइश है ]
क्या बात है!! बहुत खूब!
लाल रंग बना....
फूल पर चड़ा दूँ....
हर रोज़ कहाँ
आँसू मिलते हैं.....!!
wah bahut hi behtarin
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