Sunday, April 13, 2008

पहचान


धूप ने छुआ
तो शाख से
छाँव गिर गई....

छिपे हुए साये
रौशनी में
साफ दिख गये....

सहमी हुई कालिमा...
धूप में
शीतल लगी.....

तेरे साथ ही
तेरे साये भी
आज मिल लिये.....

इस तरह यह
छू गये....
नेह से आँख भर गई......

पहचान कर
फिर एक बार
रूह से रूह बँध गई

3 comments:

mehek said...

इस तरह यह
छू गये....
नेह से आँख भर गई......

पहचान कर
फिर एक बार
रूह से रूह बँध गई
wah baut khubsurat bhav bane hai.

sonali said...

doctorni sahiba aap toh chaa gaye!!!

DR.ANURAG ARYA said...

धूप ने छुआ
तो शाख से
छाँव गिर गई....

जब पहली पंक्तिया पढी तो लगा किसी ओर मुडेगी, खैर .......इसलिए आप बेजी है ......