
धूप ने छुआ
तो शाख से
छाँव गिर गई....
छिपे हुए साये
रौशनी में
साफ दिख गये....
सहमी हुई कालिमा...
धूप में
शीतल लगी.....
तेरे साथ ही
तेरे साये भी
आज मिल लिये.....
इस तरह यह
छू गये....
नेह से आँख भर गई......
पहचान कर
फिर एक बार
रूह से रूह बँध गई
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
3 comments:
इस तरह यह
छू गये....
नेह से आँख भर गई......
पहचान कर
फिर एक बार
रूह से रूह बँध गई
wah baut khubsurat bhav bane hai.
doctorni sahiba aap toh chaa gaye!!!
धूप ने छुआ
तो शाख से
छाँव गिर गई....
जब पहली पंक्तिया पढी तो लगा किसी ओर मुडेगी, खैर .......इसलिए आप बेजी है ......
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