कई बार
मौन को
अपने शब्दों के बीच रख
उक्ति में
अर्थ भरा है.....
आज आकुल मौन के
अनुवाद के लिये
अक्षर अपरित्याज्य है....
इनकी खामोशी में...
अभीष्ट अर्थ
लुप्त हो रहे हैं....
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POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
8 comments:
अच्छा मौन,
मनन करता.
बहुत गहरी!
जीवन में डर तो घड़ी-घड़ी लगता ही रहता है, मगर फ़िलहाल जो है वह आपकी अपरित्याज्य, अभीष्ट जैसी क्लिष्ट बुनावट से लग रहा है.. और यह भी भारी-भारी आप मौन के बारे में बोलते हुए बोल रही हैं.. वाचाल होंगी फिर हमारे हाल क्या होंगे?
प्रमोदजी,
सही है...इस बुनावट से बहुत सहज मैं भी नहीं...किन्तु जो कहना था उसके लिये इनसे उपयुक्त शब्द भी नहीं ढूँढ पाई
अर्थ तो मौन और कोलाहल में बहुधा एक से ही मिलते हैं। कभी व्यक्ति सुनता है, कभी नहीं सुनता।
khaamosh paighaam
आपका मौन भी उतना ही खूबसूरत है जितने आपके शब्द ....
Aaaj pehli baar aapke blog padha Beji Bahut achha lagaa. Abhi saari kavitaayein nahin padh opaaaya hoon parantu jo padhi hai bahut achhi aur gehri lagi...
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