Monday, May 05, 2008

संकेत


वहीं था...
.....खामोश....
उसका होना
वहाँ की हवा को पता था

शायद किसी स्पर्श से जाग जाता
कोई साँस की फूँक से
साँस लेता
पोर को थाम
उठकर गाने लगता
हथेली के नीचे
उछल कूद करके
शोर को भी
वह लय में सुनाता...

संगीत था तो वहीं बस
शायद समय की
प्रतीक्षा उसे थी
जो छूकर उसे दे....
बोलने का इशारा
ब्रम्हाण्ड में स्वर
घोलने का इशारा...

7 comments:

राजीव रंजन प्रसाद said...

बहुत सुन्दर रचना...

***राजीव रंजन प्रसाद

DR.ANURAG ARYA said...

शायद किसी स्पर्श से जाग जाता
कोई साँस की फूँक से
साँस लेता
पोर को थाम
उठकर गाने लगता
हथेली के नीचे
उछल कूद करके
शोर को भी
वह लय में सुनाता...

जिंदगी का गीत ....

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप की भाषा में कितना जीवन है? अथाह।

mehek said...

behad khubsurat

Udan Tashtari said...

एक और अच्छी रचना.

मीत said...

बहुत सुंदर बेजी.

Keerti Vaidya said...

good one