Monday, November 03, 2008

डायलॉग















दोनो पक्ष
बैठ जाते हैं
जैसे सामने
कैरम बोर्ड हो
काली और सफेद गोटियाँ
दोनो तरफ का ध्यान
क्वीन पर
वे लगातार दृश्य स्कैन करते हैं
सही मौके के लिए
सही कवर की तलाश में
अगर आप इस खेल में माहिर नहीं
तो हर चाल समझ नहीं सकते
क्योंकि जो आहत होता है
निशाना उस पर नहीं है
यहाँ साझेदारी का सवाल नहीं है
विषय हार जीत का है
सही गलत का नहीं
निपुणता का है
स्ट्राइकर से चलती हर पारी
किसी षड़यंत्र का हिस्सा है
कॉइन से कॉइन को हार
जीतने वाला सिर्फ
दो में से एक
खिलाड़ी है
.....
नाम भी है
इस खेल का
......
संवाद
....
क्वीन हर वर्ग की अलग है
पर सत्ता से जुड़ी हुई...
घर की,
धर्म की
नहीं तो देश की....

7 comments:

राहुल सि‍द्धार्थ said...

blogvani par chalate-chalte aapaka daayalog padhaa. sachmuch sabki nazar queen par hai par is khel me jo maahir hai wah usako harap leta hai chaahe wo galat tareekaa hi ku n ho.
shubhkamnaaye.
rahul siddharth

Pramod Singh said...

पढ़ लिया, हालांकि स्‍कैन करने की निपुणता नहीं. दो आई वुड से इट्स नॉट डायलॉग, इज़ इट? क्‍वीन के आजू-बाजू के सिवा खड़े होने की और जगह नहीं? उसकी वैलिडिटी?

Neelima said...

डायलॉग अच्छा लगा !

डॉ .अनुराग said...

खेल जारी है......!

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी said...

आप की कविता में यह रंग नया है।

Udan Tashtari said...

एक अलग अंदाज-अच्छा लगा!!

दीपक said...

डायलाग पढ लिया अब स्कैन कैसे करे?खराब हालात को बडे अच्छे तरीके से रखा है आपने !!