Wednesday, December 03, 2008

परिकलन












सभी खिड़कियों से
आसमाँ के पर्दे
उतार लो....
आज खुले में
आसमाँ नाप आयें..

बहुत हुआ
नाप का गलत माप आंकना....
ज़रा साथ में
विस्तार का
अनुमान भाँप आयें

6 comments:

ranjan said...

खुब

mehek said...

bahut sahi baat kahi,ab vistar se naap lena jaruri hai,yuhi aasman ki gehrai ka andaaza nahi lagana hame.bahut khub.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मापें आसमान
खिड़कियाँ
और खुद को भी
बेहद जरूरी है
माप
यदि कुछ
कुछ भी बुनना चाहें।

manvinder bhimber said...

बहुत हुआ
नाप का गलत माप आंकना....
ज़रा साथ में
विस्तार का
अनुमान भाँप आयें
bahut sunder lilka hai

शोभा said...

बहुत हुआ
नाप का गलत माप आंकना....
ज़रा साथ में
विस्तार का
अनुमान भाँप आयें
बहुत सुन्दर लिखा है।

दीपक said...

मगर जिसका अनुमान ना हो और अनुमाप ना हो वही तो विस्तार है ...