Wednesday, December 17, 2008

पहुँच













मुझे यकीन है
मेरे मन में खिला
हर भाव
तुम तक पहुँच जाता है
मैने देखा है
इम्हे तुम्हारी आँखों में
अंकुरित होते हुए....

......
तभी तो
मेरे खिल कर
बिखरते ही
तुम्हारी आगोश में
मिल जाती है
मुझे मेरी ज़मीं....
मेरा आसमाँ

16 comments:

रंजना said...

वाह ! बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति......

Pramod Singh said...

मेरे साथ ऐसा क्‍यों नहीं हो पाता? नहीं, रियली, सच्‍ची में?

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर रचना,सुन्दर भाव है।

Vidhu said...

मुझे यकीन है
मेरे मन में खिला
हर भाव
तुम तक पहुँच जाता है
मैने देखा है
इम्हे तुम्हारी आँखों में
अंकुरित होते हुए....

shabd rachnaa bemisaal hai ...badhai

Amit said...

bahut he sundar rachna hai....likhte rahe...

हिमांशु said...

मन के भाव का अत्यन्त सुन्दर प्रस्तुतीकरण.
धन्यवाद.

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

सुंदर अभिव्यक्ती है

Parul said...

khuub..

badey din baad ?

डॉ .अनुराग said...

इसे महसूस करने के लिए दिल चाहिए धड़कता हुआ ...... है ना डॉ बेजी

शोभा said...

तभी तो
मेरे खिल कर
बिखरते ही
तुम्हारी आगोश में
मिल जाती है
मुझे मेरी ज़मीं....
मेरा आसमाँ
बहुत अच्छा लिखा है।

दीपक कुमार भानरे said...

खूबसूरत रचना . धन्यवाद .

bahadur patel said...

bahut achchha.bahut gahari baat hai. badhai.

विष्णु बैरागी said...

सुन्‍दर भावाभिव्‍यक्ति है । अच्‍छा लगा यह कविता पढ कर ।

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

तुम्हारी आगोश में
मिल जाती है
मुझे मेरी ज़मीं....
मेरा आसमाँ

****MIND BLOWING

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कंचन सिंह चौहान said...

shabda kitne kam aur aurth kitne jyada hai is kavita ke....!!!!!!!!!

अनूप भार्गव said...

सुन्दर ...