
सुनहरी गुलाबी घटा दे दो
समंदर की नमकीं हवा दे दो
थोड़ी अलग सी ज़मीं दे दो
एक टुकड़ा नया आसमाँ दे दो
जाने पहचाने आगोश में
शरारत कोई नयी दे दो
आँखो की चमक में आज
पहचान थोड़ी बदल दे दो
मेरे हाथों की लकीरों में
मकसद कुछ और हसीं दे दो
साथ मेरे चल कर के
रास्तों को मंजिल दे दो
गुलाबी मैं सुनहरे तुम
चलो सूरज डुबा आओ
सोने सी सुलग जाऊँ
बरस तुम जिंदगी दे दो...




5 comments:
सबसे पहले तो आप और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.
बहोत ही खुबसूरत कविता
ढेरो बधाई आपको...
अर्श
नए साल की असीम शुभकामनाएँ...
खूबसूरत कविता है! सभी की चाह समेट ली है आपने!
नया साल खुशियाँ लाए!
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति, नववर्ष की शुभकामनाएँ
नया साल आए बन के उजाला
खुल जाए आपकी किस्मत का ताला|
चाँद तारे भी आप पर ही रौशनी डाले
हमेशा आप पे रहे मेहरबान उपरवाला ||
नूतन वर्ष मंगलमय हो |
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