
कंचे से कंचे पर
निशाना साधेंगे तो
क्या वह पल
जो समय की परत के नीचे
जमा है....
पिघल जायेगा....?!
फिर बुलबुला बन...
दो क्षण के लिये ही सही
ठहल पायेगा...
वो गुलाबी नीले से होकर
गुजर जायेगा...
........
बस एक बार फिर
इन कंचों में
क्या इंद्रधनुष
साँस ले ...
सुकून से सो पायेगा....?!!







