
सुनहरी गुलाबी घटा दे दो
समंदर की नमकीं हवा दे दो
थोड़ी अलग सी ज़मीं दे दो
एक टुकड़ा नया आसमाँ दे दो
जाने पहचाने आगोश में
शरारत कोई नयी दे दो
आँखो की चमक में आज
पहचान थोड़ी बदल दे दो
मेरे हाथों की लकीरों में
मकसद कुछ और हसीं दे दो
साथ मेरे चल कर के
रास्तों को मंजिल दे दो
गुलाबी मैं सुनहरे तुम
चलो सूरज डुबा आओ
सोने सी सुलग जाऊँ
बरस तुम जिंदगी दे दो...





