
झूठी आधी अधूरी ख्वाईशें
सिरहाने रखी हैं...
बड़ी मीठी हैं ये...
सच मैने चखी हैं...
ज़रा स्वाद लोगे
तो ऐसा लगेगा
जैसे नारीयल की मीठी
शराब हो....
थोड़ा नशा है
थोड़ी प्यास भरी है
जब यह घुलेंगी
तुम्हारी नींद उड़ेगी
अधूरी सी बातें
आधी रात में....
कटे चाँद में आ
बेकरार करेंगी....
........
हैरान हो...?!!
........
तुम्हे क्या लगा
अकेले यूँ ही....
नींद आ जायेगी?!!




10 comments:
सच भी और रूमानी?
nice!
तुम्हे क्या लगा
अकेले यूँ ही....
नींद आ जायेगी?!!
गजब!! बहुत खूब!
हम तो मदहोश हो रहे हैं... हम्म्म्म
---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम
:) :) :)
बहुत सुंदर ।
झूठी आधी अधूरी ख्वाईशें
सिरहाने रखी हैं...
बड़ी मीठी हैं ये...
सच मैने चखी हैं...
सच मीठी सी है। अद्भुत।
वाह वाह .........
waah..beji
Beautiful. Beji.
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