Sunday, March 01, 2009

वापसी












कई बार
छोटी छोटी अनुभूतियों में
एक जीवनकाल के अनुभव
को सुला कर
कई परतों के नीचे
दबा आते हैं.....

फिर... जादू की तरह
नये संयोग
अंकुरित होते हैं....

नन्हे कोंपल पहन कर
नये अनुभव जन्म लेते है...


.................
बीज मे सोया ही सही
पेड़ तो
जिंदा रहते हैं....

8 comments:

mehek said...

नन्हे कोंपल पहन कर
नये अनुभव जन्म लेते है...

bahut khub kaha,sundar

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सचमुच जिन्दा रहते हैं।

विनय said...

बहुत मनमोहक और ताज़गी में भीगी हुई कविता है!

Udan Tashtari said...

बीज मे सोया ही सही
पेड़ तो
जिंदा रहते हैं....

-बहुत गहरी बात कही.

संजय तिवारी ’संजू’ said...

बहुत बडिया लिखा है

संजय तिवारी ’संजू’ said...

बीज मे सोया बहुत गहरी बात है

कंचन सिंह चौहान said...

पता नही आपने क्या कहा और मैने क्या समझा...लेकिन जो समझा वो शब्दातीत है...!

रंजना said...

बहुत ही सही कहा......

बीज में सोये ही सही,वृक्ष पड़े होते हैं.......
गहरी बात को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से रचना में ढाल दिया आपने....