
कई बार
छोटी छोटी अनुभूतियों में
एक जीवनकाल के अनुभव
को सुला कर
कई परतों के नीचे
दबा आते हैं.....
फिर... जादू की तरह
नये संयोग
अंकुरित होते हैं....
नन्हे कोंपल पहन कर
नये अनुभव जन्म लेते है...
.................
बीज मे सोया ही सही
पेड़ तो
जिंदा रहते हैं....




8 comments:
सचमुच जिन्दा रहते हैं।
नन्हे कोंपल पहन कर
नये अनुभव जन्म लेते है...
bahut khub kaha,sundar
बहुत मनमोहक और ताज़गी में भीगी हुई कविता है!
बीज मे सोया ही सही
पेड़ तो
जिंदा रहते हैं....
-बहुत गहरी बात कही.
पता नही आपने क्या कहा और मैने क्या समझा...लेकिन जो समझा वो शब्दातीत है...!
बीज मे सोया बहुत गहरी बात है
बहुत बडिया लिखा है
बहुत ही सही कहा......
बीज में सोये ही सही,वृक्ष पड़े होते हैं.......
गहरी बात को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से रचना में ढाल दिया आपने....
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