Sunday, March 08, 2009

आस्था













इतनी रौशनी ना कर कि
साया भी दिखाई ना दे....
सच को ऐसे ना सुना
कि माया भी
खामोश हो चले....
थोड़े भरम का हौसला , खुदा
रहने दे.....
बिना सबूत, बिना दलील
मेरा भरोसा बना रहने दे.....

10 comments:

अफ़लातून said...

ऐतिहासिक ! - बिना तर्क ।

कंचन सिंह चौहान said...

aap hamesha hi kuchh aisa likhti hai ki lagta hai ki kaise likh liya hoga aisa.

holi ki shubhkamanae.n

अंशुमाली said...

उम्मीद करते हैं आपका भरोसा बना रहे।

सुशील कुमार छौक्कर said...

हमेशा की तरह उम्दा।

mehek said...

बिना सबूत, बिना दलील
मेरा भरोसा बना रहने दे..... bahut badhiya

विनय said...

रंगों के त्योहार होली पर आपको एवं आपके समस्त परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ

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चाँद, बादल और शाम
गुलाबी कोंपलें

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

कड़वा बहुत है सच कुछ चीनी का आवरण चाहिए।
बहुत खूबसूरत है रचना।

संगीता पुरी said...

छोटी ... पर बहुत सुंदर रचना... होली की ढेरो शुभकामनाएं।

मीत said...

क्या कहूं ? न .... सामर्थ्य नहीं है !!

होली मुबारक़ हो !!

अर्चना said...

bahut jaruri hai ye bharosa jine ke liye,bana rahe.