
बंद नींद के दरवाज़े पर
अँधकारमय अस्पष्टता में
खटखटाता है कोई सपना
गाढे अंधेरे में
धुँधले से साये पहन
शरीर हो जाता है
फिर धीरे से फैलता है
एक अनोखी सी
गंध की तरह
पूरे कमरे में
...............
अनुभूतियों से अभिव्यक्ति के मुखौटे उतार
खरेपन में निहारता है
मन की पेटी खोल कर
लज्जा, डर, बौखलाहट ,दुख ...
हर्श, चैन, खुशबू, आराम....
प्यास ,तरस....
बिखेरता ही चला जाता है...
और तब
उस कमरे में रेंगते हैं साँप
ऊँची इमारत से
फिसल जाता है पाँव
कोई साया हाथ पहन
घोंटता है गला .
...........
बौखला कर
चैतन्य की तरफ
भागता है मन
सायों की पकड से जितनी दूर
... खोल देता है दरवाज़ा .......
सिटकनी पर रह जाते हैं
बौखलाहट के निशान
और पूरे चैतन्य पर
फैल जाती है गँध.....




11 comments:
जो चषक हाथ धन्वन्तरि के थमा, नीर उसका सदा आप पाते रहें
शारदा के करों में जो वीणा बजी, तान उसकी सदा गुनगुनाते रहें
क्षीर के सिन्धु में रक्त शतदल कमल पर विराजी हुई विष्णु की जो प्रिया
के करों से बिखरते हुए गीत का आप आशीष हर रोज पाते रहें
राकेश
one of your best.....superb....
सिटकनी पर रह जाते हैं
बौखलाहट के निशान
achchha laga
आह!! वाह..बहुत बेहतरीन!!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल ’समीर’
आज खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!
पल पल सुनहरे फूल खिले , कभी न हो कांटों का सामना !
जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे , दीपावली पर हमारी यही शुभकामना !!
Dear Beji ji,
आज तो आपने
सुन्दर कविता सुना दी
बहुत सुन्दर ...
स स्नेह दीपावली की शुभकामनाएं
आपके परिवार के सभी के लिए
- लावण्या
बौखला कर
चैतन्य की तरफ
भागता है मन
क्या अभिव्यक्ति है
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।
युग सदा विज्ञान का, चलता रहेगा।।
रोशनी से इस धरा को जगमगाएँ!
दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!
bahut badhiya abhivyakti.
wow..you have an awesome collection of poems do check out
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