
ऐसे भी रुकती है हवा
सांस रोक कर
कि उसके पांव
वहीं जड हो जाते हैं
........
ठोस
............
जैसे कोई दीवार खडी हो गई हो....
और उमस के साथ
उठती है
किसी बासी बात की गंध
सन्नाटे सी काई के नीचे
कुम्हला जाते हैं सुर
ध्वनि गूंगी हो जाती है
.................
मालूम है ना
ठहरी हुई हवा में
संगीत उभरता नहीं कभी
...............
क्यूँ ना...
तुम ही सांस फूंक दो
कि थोडी हलचल तो हो....




13 comments:
क्यूँ ना...
तुम ही सांस फूंक दो
कि थोडी हलचल तो हो....
गहरे भाव
bahut hi gahan ahsaas.
ठहर जाए जब जीवन उसे कोई प्रेरणा चाहिए।
जीवन के लिए एक जीवन्त कविता।
हूं. फूंकने की कोशिश किये लेकिन देख रहे हैं सांस अटक रही है..
चल सकूँ...
छू सकूँ…
आज मैं...
काश मैं...
मैं बन सकूँ
क्यूँ ना...
तुम ही सांस फूंक दो
कि थोडी हलचल तो हो....
शानदार. !
इतने गहरे भाव हैं की जिमें हम कहीं बहुत गहरे तक डूब जाते हैं
waah kya bat hai in thami hawaa me jo mar ke ji uthega .ye pyar kuchh aisi hi chij hoti hai ....
क्यूँ ना...
तुम ही सांस फूंक दो
कि थोडी हलचल तो हो....
बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति है।
बधाई।।
:-)bahut acchey..BEJI
Waah !!! Bahut bahut sundar !!!
★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
जय ब्लोगिग-विजय ब्लोगिग
★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
Beji Jaisonji
क्यूँ ना...
तुम ही सांस फूंक दो
कि थोडी हलचल तो हो....
सुन्दर शब्द, सुंदर अभिव्यक्ति, Jaisonji! इन्ही शब्दो मे आपकी रचना के लिऍ मेरे भाव है. लिखते रहे>
♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
मगलभावनाओ सहीत
मुम्बई-टाईगर
SELECTION & COLLECTION
एक शब्द में कहूं तो "बेमिसाल "
yaar aap ki baat mein hamesha dum rehta hai! la-jabaab
Post a Comment