Friday, December 11, 2009

पैराडौक्स

इस मौन का
अनुवाद नहीं
इस ठहराव की गति नहीं
इस अंतराल पर
रुक कर
कोई उक्ति
अर्थ में जुड़ सके
सँभव नहीं
शब्द को मौन से ढँक कर
दफ्न कर..
विरक्ति
का ढेर कर....
मुड गये....
..................




उम्मीद में...



......शायद...

वो आर्द्रता तुम्हारे पास हो...
दफ्न उस शब्द को
अंकुरित कर सको......

16 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत भटकातीं हैं
ऐसी चाहतें।

अर्कजेश said...

....शायद...

वो आर्द्रता तुम्हारे पास हो...
दफ्न उस शब्द को
अंकुरित कर सको......

वाह क्‍या बात कही है । वो आर्द्रता ही तो खोजता है कोई .....

महावीर बी. सेमलानी said...

★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
ब्लोग चर्चा मुन्नभाई की
★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★

♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
अति सुन्दर जी!
धन्यवाद!
महावीर बी. सेमलानी "भारती"
♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

यह पढने के लिऎ यहा चटका लगाऎ
भाई वो बोल रयेला है…अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था

हे प्रभु यह तेरापन्थ

मुम्बई-टाईगर

Udan Tashtari said...

वो आर्द्रता तुम्हारे पास हो...
दफ्न उस शब्द को
अंकुरित कर सको....

-गजब उम्मीद.....वाह!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"इस मौन का
अनुवाद नहीं......."

सुन्दर अभिव्यक्ति!

अनिल कान्त : said...

Superb !

kuldip said...

खुबसूरत भाव हैं।शब्दों का उत्तम संयोजन।

हृदय पुष्प said...

इस मौन का
अनुवाद नहीं
......
.शायद...
वो आर्द्रता तुम्हारे पास हो...
दफ्न उस शब्द को
अंकुरित कर सको......
"आर्द्रता" सभी की चाहत - अच्छे शब्दों के साथ गहरे भाव - अति सुंदर.

Dheerendra Tiwari said...

ये मौन
विचारो की श्रंखला को
जन्म देता है क्यों ...
आसक्ति और विरक्ति के
भंवर में ह्रदय डुबो देता है क्यों ...
ये मौन
मौन होकर भी
मौन नहीं है क्यों ...

Kamlesh Kumar Diwan said...

achchi kavtayen hai badhai

सागर said...

वो आर्द्रता तुम्हारे पास हो...
दफ्न उस शब्द को
अंकुरित कर सको....

वाह ! मर्म को अत्यधिक संवेदनशील उतरते देखा....अच्छा लगा!

Vijay Kumar Sappatti said...

amazing work ji ...mere paas shabd nahi hai ...kuch kahne ke liye ..

neel said...

excellant............i have no word 4 u

rajesh kumar sharma said...

mon se bada kuch nahi hai
bahut sunder
aapka mere blog http/gyansarita.blogspot.com
par swagat hai

vedvyathit said...

mere blog pr meri maun kvita dekhne ki kripa kren in do rchnaon ke bhav kitne miltejhulte hain
http://sahityasrajakved.blogspot

Ravindra Ravi said...

वाह वाह वाह. तारीफ के लिये शब्द ही नही.

इस मौन का
अनुवाद नहीं

क्या बात है..