
मैं तुम्हारा
हिस्सा बनना चाहती हूँ
शब्दों कें बीच में
जैसे ठहराव पिरोया है
तरंगों को जैसे
बहाव ने थामा है
संगीत की ध्वनि तो नहीं...
स्वरों के बीच का
मौन बनना चाहती हूँ
व्यक्त करने की कोई व्याकुलता नहीं....
तुम्हारी अभिव्यक्ति का
अर्थ बनना चाहती हूँ
इमारत जो बनेगी ऊँची ही होगी....
मैं तो इसका आधार बनना चाहती हूँ
अस्तित्व में तुम्हारे...
तुम्हारी ही आत्मा है....
बस
तुम्हारा आत्मविश्वास बनना चाहती हूँ
प्रयत्न तो तुम्ही हो....
मैं तुम्हारा विश्राम बनना चाहती हूँ....
...............
अंश से अंग बन
अखंड बनना चाहती हूँ...
(photo credit-http://www.myinkblog.com/2008/07/03/create-a-trendy-music-style-background/ )





