
उनमुक्त उड़ान को
हक से
काबू में कर
स्वत्व रख
अभिभूत कर
मुट्ठी में भर
कहते हो
एक बार उड़ के तो दिखा
बताओ
रंग झड़ी तितली भी
कभी उड़ान भरती है??!
POEMS IN HINDI moments....thoughts....emotions....analysis..... descriptions...reflections....expressions....impressions.....my words....my feelings
Read in your own script
Roman(Eng)
Gujarati
Bangla
Oriya
Gurmukhi
Telugu
Tamil
Kannada
Malayalam
Hindi
Via chitthajagat.in
17 comments:
nice
साधुवाद...बहुत गहरी बात कह दी.
फिर भी नायिका गाती घूमती है -"कितना सुख है बंधन में " :)
बहुत सुन्दर बात कही बेजी
सुंदर सहज कविता!
बताओ
रंग झड़ी तितली भी
कभी उड़ान भरती है??!
उफ ! क्या कह दिया
त्रासद, शोर करती हुई दिल में उतर गयी रचना. उम्दा -- बहुत उम्दा
कुछ कह गयी कविता एक झटके में कि स्तब्ध रह गये विचार ।
bahut sundar...
Badhiya !!
बहुत सुन्दर भाव!!
Pain encapsulated beautifully!
बहुत सुन्दर भाव!
क्या बात है आपके क्या कहने
दोनों रचनायें बेहद भावपूर्ण
है नारी ह्रदय की कोमलता अलग ही
होती है वास्तव में नारी और प्रकृति
एक ही है इसलिये उसके चिंतन
में लाजवाव प्रकृति का समावेश हो ही
जाता है..पर इसमें आत्मग्यान
का जुङाव होने से और अधिक
प्रभाव पैदा हो जाता है
satguru-satykikhoj.blogspot.com
Very beautiful
happy birthday to you
आज आपकी कई रचनाएँ पढ़ी, आपकी रचनाओं में एक अलग अंदाज है, पढ़कर अच्छा लगा, और आपका प्रोफाइल फोटो तो कमाल का है!
adhbhut
I liked your blog...
behad khubsurat
Post a Comment