
मुझे यकीन है
तुम कहीं दूर नहीं गये
पास ही हो
मैने देखा है तुम्हे
आज भी
माँ के साथ खड़े
फिर भी ना जाने क्यूँ
तस्वीर देख तड़प जाता है मन
जैसे तुम ना होकर बस परछाई हो कोई
ऐसा लगता है कोई दीवार सी है
पास होकर भी कहीं दूर हो तुम
वैसे तो सब खैरियत से है
पिछवाड़े में धान की फसल
भी तैयार होने को है
रात को किवाड़ सब मैं ही देख लेती हूँ
माँ भी देर सबेर सो ही जाती हैं
पर....
तुम्हारी आवाज़ सुनने का मन करता है
तुम्हे छूने को तरस जाती हूँ.....
....
कभी सपने में ही आ जाया करो
अपनी आवाज़ में नाम से मुझे पुकारा करो
..............................
आखरी साँस में छाती से लगी थी जब मैं
तेरे सीने की गरमी से लौ सी जली थी जब मैं
उस आग को ना बुझने देना.....
मेरे अंदर मेरी साँसों में चलते रहना........
28 मई 2010 को पापा हमारे बीच से चले गये।




7 comments:
पापा को भावभीनी श्रद्धांजलि!
पिछले दिनों नैट से ओझल रहने का कारण मिला।
speechless!
खूब तो नही ही कहा जा सकता इस भीगी ससंवेदना के बाद... महसूस कर रही हूँ बहुत भीतर तक...!
आपके मन की तड़पन समझ सकती हूँ,ये वेदना तो बरसों अनवरत साथ निभाती है,कसना पड़ता है मन को। निश्चय ही पापा आपके पास हैं।सम्भालिए अपने को तो वो खुश होंगे,आपको भी कुछ राहत मिलेगी।
उनकी आत्मा को शान्ति मिले यही ईश्वर से प्रार्थना है।
इसे कविता कहना या प्रशंसा करना न्याय नही होगा इस कविता की भावना के साथ..हमारे अपने साअथ छोड़ जाते हैं..जिंदगी चलती रहती है..फ़सलें पकती रहती हैं..दिन रातों मे और रातें दिन मे तब्दील होती रहती हैं..साँसे आग सी जलती रहती हैं..और यह आस भी एक उ्म्मीद बन कर धड़कती रहती है..कि कहीं किसी मोड़ पर कोई आवाज दे कर फिर से पुकार लेगा...मगर हमारे अपने कभी हमारी जिंदगी से दूर जाते नहीं हैं..वे हमारी स्मृतियों मे जीवित रहते हैं..हमारी नसों मे धड़कते रहते हैं..उनका हमारे हर लम्हे मे साथ होना हमारी साँसों मे घुला होना ही हमारे उन रिश्तों के शाश्वत्य की निशानी होता है...
पिता जी की आत्मा को हार्दिक श्रद्धाँजलि..
कैसी बिडम्बना है कि मैं अभी अपनी मां को याद कर रहा था कि आपके ब्लाग पर आ पहुंचा. मेरी मां को बिछुङे तीन साल हो गये लेकिन अभी भी मन वास्तविकता स्वीकार करने को तैयार नही. लगता है शायद मै कोई डरावना सपना देख रहा हूं. बस जैसे ही घर लौटूंगा, मां मुझे देहरी पर मेरा इन्तजार करती मिलेगी और मै उससे चिपट जाऊगा.
आपके पापा को मेरी और से भावभीनी श्रद्धांजलि..
ओह ,
कितनी संवेदनशीलता से लिखा है ...हर उस बेटी का दर्द उकेर दिया है जिसने अपने पिता को खो दिया है ...
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