बस की भीड़ में फँसी हुई
लेडिस कंपार्टमेंट में खड़ी हुई
हमेशा थोड़ी जल्दी में
कुमकुम में और हल्दी में
आटे में पानी कितना हो
और दिया की बत्ती कैसी हो
सास की चाय की शक्कर और
टीके लगवाने के चक्कर सब
चश्मे के पीछे आम शक्ल
पर कर्मठ तन, बेजोड़ अक्ल
कार चलाना सीखती है
शेरिंग ऑटो से आती है
यह लोग जो इसके साथ खड़े
सब फ्रेम में अच्छे लगते हैं
पर चहकती सी वह आम हँसी
सब फ्रेम बदलना जानती है
नज़दीक से देखो जब उसको
थोड़ी दिवानी लगती है
अपनों के सुकून के खातिर
जान दाँव पर लगा आ जाती है
भूचाल कहीं
आक्रोश कहीं
अखबार में सब छपते हैं
खामोश सी ये बात जो चल निकली
आँधी में नक्शे ढह जायें
जाओ पत्री सब पढ़ आओ
तकदीर बदलने वाली है
कोई विद्रोह नहीं ना अनशन है
बस इनकी फसल तैयार खड़ी....
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8 comments:
एक मध्यमवर्गीय लडकी का सही खाका खींचा है ..अच्छी प्रस्तुति
बहुत सुन्दर रचना।
beautiful presentation .....
मिलती जुलती कई कविताएं पढ़ी है इस विषय पर...... ओर सब भली लगी है
Happy Birth Day to youuuu.....dher sara pyar...
सर्वप्रथम जन्मदिन की बहुत सारी शुभकामनाएं स्वीकार करें.
यह लोग जो इसके साथ खड़े
सब फ्रेम में अच्छे लगते हैं
पर चहकती सी वह आम हँसी
सब फ्रेम बदलना जानती है
क्या बात है बहुत खूब
बहुत सुन्दर अभिवयक्ति
विकास गर्ग
vikasgarg23.blogspot.com
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